बुध पर पानी कैसे मौजूद है?

बुध सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह है. सौर मंडल में जब ग्रहों की गणना की जाती है तो मर्करी यानि बुध सबसे पहले आता है. उसके बाद कम्रश: शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह की कक्षाएं आती हैं. सौर मंडल में यही चारों ग्रह ठोस रूप में है, इन्हें आंतरिक ग्रह भी कहा जाता है. मंगल के बाद आने वाले ग्रहों को बाह्य ग्रह कहा जाता है, जिनमें बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण आते हैं. बाह्य ग्रह गैस रूप में होते हैं.

अब बात करते हैं सूर्य के सबसे करीबी और सबसे छोटे ग्रह बुध की. सिर्फ 88 दिनों में सूर्य की परिक्रमा करने वाला बुध बेहद चमकीला ग्रह है. अपने चुंबकीय क्षेत्र के कारण यह बेहद दिलचस्प माना जाता है. अब हासिल जानकारी के मुताबिक बुध में गंधक और लोहा काफी मात्रा में है. दिन में 427 डिग्री सेल्सियस के तापमान वाले इस ग्रह में आखिर गंधक भस्म क्यों नहीं होता है? आम तौर पर ठोस गंधक 115.21 डिग्री सेल्सियस पर गलने लगता है. लेकिन बुध में ऐसा क्यों नहीं होता? आखिर इस ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र कैसे बना? बुध पर पानी कैसे मौजूद है?

सौर मंडल के दूसरे ग्रहों की तरह, बुध भी आदिकाल में एक विशाल बादल से बना. यह साढ़े चार अरब साल पुरानी बात है. यह बादल गैस और धूल से बना था और नए नवेले सूरज के इर्द गिर्द घूम रहा था. सबसे पहले तो कुछ पदार्थों के छोटे छोटे टुकड़े यूं ही आपस में जुड़े. करोड़ों वर्षों की अवधि में उनका विस्तार होता गया.

जब कई किलोमीटर लंबे धूल के ढेर साथ आते हैं, तो वे गर्म होकर एकजुट होने लगते हैं. ब्रह्मांड में बनता भंवर जैसे आकार का यह द्रव्यमान दूसरे पदार्थों को भी अपनी तरफ खींचने लगता है. अंत में गर्म, गोल आकार वाले ग्रह सामने आते हैं. सूरज और उसके अत्यधिक विकिरण से कोई ग्रह जितना दूर होगा, वहां बर्फ की संभावना उतनी ज्यादा होगी. फिर बर्फ पानी से बनी हो या फिर मीथेन या दूसरी अस्थिर गैसों से. यहीं पर शनि जैसे विशाल गैस वाले ग्रह बने.

लेकिन सूरज के नजदीक ठोस सतह वाले ग्रहों ने आकार लिया, जैसे मंगल, पृथ्वी, शुक्र और बुध. अमेरिकी अंतरिक्ष यान मैसेंजर ने बुध की सतह की पड़ताल की. बुध पर पृथ्वी और मंगल की तुलना में ज्यादा लोहा है. बुध पर गंधक यानि सल्फर और क्लोरीन जैसे तत्व पाकर वैज्ञानिक हैरान हैं. बर्लिन में डीएलआर इंस्टीट्यूट ऑफ प्लेनेटरी रिसर्च के डॉ. योएर्गन हेलबर्ट इस अभियान से जुड़े हैं. वह कहते हैं, "ये ऐसे पदार्थ हैं जो इतने ज्यादा तापमान में गायब हो जाने चाहिए थे. जैसे कि गंधक तो होना ही नहीं चाहिए था. लेकिन बुध के धरातल में साढ़े चार फीसदी गंधक है. यह बड़ी हैरानी वाली बात है. तो सवाल यह है कि बुध कैसे बना और कहां पर बना."

बुध सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह है. सौर मंडल में जब ग्रहों की गणना की जाती है तो मर्करी यानि बुध सबसे पहले आता है. उसके बाद कम्रश: शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह की कक्षाएं आती हैं. सौर मंडल में यही चारों ग्रह ठोस रूप में है, इन्हें आंतरिक ग्रह भी कहा जाता है. मंगल के बाद आने वाले ग्रहों को बाह्य ग्रह कहा जाता है, जिनमें बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण आते हैं. बाह्य ग्रह गैस रूप में होते हैं.

अब बात करते हैं सूर्य के सबसे करीबी और सबसे छोटे ग्रह बुध की. सिर्फ 88 दिनों में सूर्य की परिक्रमा करने वाला बुध बेहद चमकीला ग्रह है. अपने चुंबकीय क्षेत्र के कारण यह बेहद दिलचस्प माना जाता है. अब हासिल जानकारी के मुताबिक बुध में गंधक और लोहा काफी मात्रा में है. दिन में 427 डिग्री सेल्सियस के तापमान वाले इस ग्रह में आखिर गंधक भस्म क्यों नहीं होता है? आम तौर पर ठोस गंधक 115.21 डिग्री सेल्सियस पर गलने लगता है. लेकिन बुध में ऐसा क्यों नहीं होता? आखिर इस ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र कैसे बना? बुध पर पानी कैसे मौजूद है?

सौर मंडल के दूसरे ग्रहों की तरह, बुध भी आदिकाल में एक विशाल बादल से बना. यह साढ़े चार अरब साल पुरानी बात है. यह बादल गैस और धूल से बना था और नए नवेले सूरज के इर्द गिर्द घूम रहा था. सबसे पहले तो कुछ पदार्थों के छोटे छोटे टुकड़े यूं ही आपस में जुड़े. करोड़ों वर्षों की अवधि में उनका विस्तार होता गया.

जब कई किलोमीटर लंबे धूल के ढेर साथ आते हैं, तो वे गर्म होकर एकजुट होने लगते हैं. ब्रह्मांड में बनता भंवर जैसे आकार का यह द्रव्यमान दूसरे पदार्थों को भी अपनी तरफ खींचने लगता है. अंत में गर्म, गोल आकार वाले ग्रह सामने आते हैं. सूरज और उसके अत्यधिक विकिरण से कोई ग्रह जितना दूर होगा, वहां बर्फ की संभावना उतनी ज्यादा होगी. फिर बर्फ पानी से बनी हो या फिर मीथेन या दूसरी अस्थिर गैसों से. यहीं पर शनि जैसे विशाल गैस वाले ग्रह बने.

लेकिन सूरज के नजदीक ठोस सतह वाले ग्रहों ने आकार लिया, जैसे मंगल, पृथ्वी, शुक्र और बुध. अमेरिकी अंतरिक्ष यान मैसेंजर ने बुध की सतह की पड़ताल की. बुध पर पृथ्वी और मंगल की तुलना में ज्यादा लोहा है. बुध पर गंधक यानि सल्फर और क्लोरीन जैसे तत्व पाकर वैज्ञानिक हैरान हैं. बर्लिन में डीएलआर इंस्टीट्यूट ऑफ प्लेनेटरी रिसर्च के डॉ. योएर्गन हेलबर्ट इस अभियान से जुड़े हैं. वह कहते हैं, "ये ऐसे पदार्थ हैं जो इतने ज्यादा तापमान में गायब हो जाने चाहिए थे. जैसे कि गंधक तो होना ही नहीं चाहिए था. लेकिन बुध के धरातल में साढ़े चार फीसदी गंधक है. यह बड़ी हैरानी वाली बात है. तो सवाल यह है कि बुध कैसे बना और कहां पर बना."

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